हर्फ़-ओ-लफ़्ज़ आपकी सादगी की दाद देता है
हर मुक़ाम आपकी राह में इंतज़ार करता है
हम इतने क़ाविल भी नहीं कि आप की कद्र कर सकें
आपसे अपनी दोस्ती का इज़हार कर सकें
- रुचि शुक्ला
कुछ गुस्ताखियाँ हुईं, कि लब्ज़ शायरी बन गए, यूँ पेश-ए-खिदमत हो गए, ये नजराने हमारे। -रुचि शुक्ला
हर्फ़-ओ-लफ़्ज़ आपकी सादगी की दाद देता है
हर मुक़ाम आपकी राह में इंतज़ार करता है
हम इतने क़ाविल भी नहीं कि आप की कद्र कर सकें
आपसे अपनी दोस्ती का इज़हार कर सकें
- रुचि शुक्ला
दिल में जो बात है
लबों पर ला भी न सका
राज़दाँ वो हो गए
उन्हें राज़-ए-मोहब्बत बता न सका
वो आफ़ताब नहीं, कहीं की हूर भी नहीं
वो मेरे दिल का प्यार है
जिसे मैं भुला न सका
- रुचि शुक्ला
ज़िंदगी ओस नहीं जो यूँहीं फ़िसल जाएगी
साँस वो फाँस नहीं जो यूँहीं निकल जाएगी
उम्र के साथ नए दर्द पिरोना सीखो
अगर मोत भी आ गई तो संभल जाएगी।
- रुचि शुक्ला
आज आँखों में आँसू हैं
कल होठों पर हँसी भी होगी
शिकवे भी हैं, शकायतें भी हैं।
मुश्किल ये है मोहब्बत भी है।
किसी और से दिल लगे भी तो कैसे
जीवन के पलटते पन्नों से रवानगी है
वरना ठहराव की हकीकत बुजुर्गों से पूछो
अहसास-ए-डर अनजाने आलम का
बैंक लूट कर राणा देखो पहुँच गया ससुराल ......2
सीता मैया रुपिया देखें, उड़ गए सर के बाल
जोगीरा सा रा रा रा रा.....
कच्छा खुद का फ़टा हुआ है धोती उनकी बाँधें
यसबैंक को थाम रहे देश के वो दीवाने
जोगीरा सा रा रा रा रा.........
ताल देश में मचा हुआ कैसा ये संग्राम
कमल नाथ से कमल चुरा के, भाग गया महाराज
जोगीरा सा रा रा रा रा..........
मेरी बिसरी छोड़ कहानी अपनी बिसरी जान
कुर्ता तेरा फटा हुआ है, खिसक रही सलवार
जोगीरा सा रा रा रा रा.........
सच कहना आसान नहीं
इंसा हो, भगवान नहीं।
हित के आगे झुकते हैं सब
नाम किसी का धरते हैं सब।
-रुचि शुक्ला
ज़माना कब ये समझेगा
हम मुसाफ़िर हैं यारों
कुछ देने को हो, तो दे दो
साथ कुछ नहीं है जाना ।
रुचि शुक्ला
हसरत ही रही कि,
एक बेतरतीब सी जिंदगी जी लें।
ये कायदों का रोग है लगा कि
बेमानी सी जिंदगानी रह गई।
- रुचि शुक्ला
ये नज़दीकियाँ तब तलक मुनासिब समझ जो गिरह खोलने की गुंजाइश रहे रूठना मनाना सब ठीक है पर बात करने की गुंजाइश रहे ये तकरार साथ रहने तक हैं जो अल...