Monday, 17 August 2020

हर्फ़-ओ-लफ़्ज़ आपकी सादगी की दाद देता है

 

हर्फ़-ओ-लफ़्ज़ आपकी सादगी की दाद देता है

हर मुक़ाम आपकी राह में इंतज़ार करता है

हम इतने क़ाविल भी नहीं कि आप की कद्र कर सकें

आपसे अपनी दोस्ती का इज़हार कर सकें

                                           - रुचि शुक्ला

जिसे मैं भुला न सका

 

दिल में जो बात है

लबों पर ला भी न सका

राज़दाँ वो हो गए 

उन्हें राज़-ए-मोहब्बत बता न सका

वो आफ़ताब नहीं, कहीं की हूर भी नहीं

वो मेरे दिल का प्यार है

जिसे मैं भुला न सका

                       - रुचि शुक्ला 

ज़िंदगी ओस नहीं जो यूँहीं फ़िसल जाएगी

 

ज़िंदगी ओस नहीं जो यूँहीं फ़िसल जाएगी

साँस वो फाँस नहीं जो यूँहीं निकल जाएगी

उम्र के साथ नए दर्द पिरोना सीखो

अगर मोत भी आ गई तो संभल जाएगी।

                          - रुचि शुक्ला

क़दमों तले क़ामयाबी होगी

 

           

          आज आँखों में आँसू हैं             

       कल होठों पर हँसी भी होगी

       आज मुसीबतें हैं ज़िंदगी में

        कल क़दमों तले क़ामयाबी होगी।

                                  - रुचि शुक्ला

Saturday, 15 August 2020

मुक्तक


       सागर का तल गहरा,
         आसमां का पार नहीं।
         यकीं करो मन से बेहतर,
         इनका भी विस्तार नहीं।

                                - रुचि शुक्ला
                                    Jan 2019

         जिंदगी में ख़ुशी है पर
         गमों की कमी भी नहीं
         गम को छुपा लो आँखों में
         दुनिया में ख़ुशी की कमी भी नहीं
                   
                                 - रुचि शुक्ला
                                      dec 1997
 
           कर्मों के हक़दार सुनो
           कर्मों के तुम पार चलो
           माया के जंजालों को
           थोड़ा-थोड़ा पार करो ।
    
                              - रुचि शुक्ला
                                   Sep 2021

Friday, 14 August 2020

हमदम अपना सा मिलता नहीं है

 

शिकवे भी हैं, शकायतें भी हैं

मुश्किल ये है मोहब्बत भी है।

किसी और से दिल लगे भी तो कैसे
हमदम अपना सा मिलता नहीं है।  

                              - रुचि शुक्ला

मौसम ही तो है, गुजर जाएगा

 


जीवन के पलटते पन्नों से रवानगी है

वरना ठहराव की हकीकत बुजुर्गों से पूछो

अहसास-ए-डर अनजाने आलम का


मौसम ही तो है, गुजर जाएगा ।

- रुचि शुक्ला

जोगीरा सा रा रा रा रा.....2020


बैंक लूट कर राणा देखो पहुँच गया ससुराल ......2

सीता मैया रुपिया देखें, उड़ गए सर के बाल 

जोगीरा सा रा रा रा रा..... 


कच्छा खुद का फ़टा हुआ है धोती उनकी बाँधें

यसबैंक को थाम रहे देश के वो दीवाने

जोगीरा सा रा रा रा रा.........


ताल देश में मचा हुआ कैसा ये संग्राम

कमल नाथ से कमल चुरा के, भाग गया महाराज 

जोगीरा सा रा रा रा रा..........


मेरी बिसरी छोड़ कहानी अपनी बिसरी जान

कुर्ता तेरा फटा हुआ है, खिसक रही सलवार 

जोगीरा सा रा रा रा रा.........



इंसा हो, भगवान नहीं।



           सच कहना आसान नहीं

        इंसा हो, भगवान नहीं।

        हित के आगे झुकते हैं सब

        नाम किसी का धरते हैं सब।

                                 -रुचि शुक्ला

हम मुसाफ़िर हैं यारों

 


       ज़माना कब ये समझेगा

          हम मुसाफ़िर हैं यारों

          कुछ देने को हो, तो दे दो

          साथ कुछ नहीं है जाना ।

                                रुचि शुक्ला

सोचने में रखा क्या है



               बहुत सोच कर समझा

         सोचने में रखा क्या है ।

         बेफ़िक्री ने सिखाया

         जीने में मज़ा क्या है ।

                       रुचि शुक्ला

Thursday, 13 August 2020

यूँ दफ़अतन प्यार का इज़हार हुआ

 

   यूँ दफ़अतन प्यार का इज़हार हुआ,

   फ़क़त एक रोशनी का, 

   उन आँखों में दीदार हुआ.....

                              -रुचि शुक्ला

हसरत ही रही कि


        हसरत ही रही कि, 

       एक बेतरतीब सी जिंदगी जी लें।

       ये कायदों का रोग है लगा कि

       बेमानी सी जिंदगानी रह गई।

                              - रुचि शुक्ला

आगोश में आकर



     जिनके आग़ोश में आकर 

     हम सब भूल जाते हैं,

     एक प्यार है मेरा

     एक दिल का टुकड़ा है

                      -रुचि शुक्ला

जो अलग हो गए तो कैसी झड़प

ये नज़दीकियाँ तब तलक मुनासिब समझ जो गिरह खोलने की गुंजाइश रहे रूठना मनाना सब ठीक है पर बात करने की गुंजाइश रहे ये तकरार साथ रहने तक हैं जो अल...