Saturday, 20 February 2021

क्यों उनकी उतनी तवज्जो न रही

 


कभी रोते थे जिस साथ के लिये

अब उस साथ की आदत न रही

उन्हें शिक़ायत है, हम मसरूफ़ हैं बहुत 

क्यों उनकी उतनी तवज्जो न रही...

                              - रुचि शुक्ला 

Tuesday, 9 February 2021

नई उम्मीद लगा बैठते हैं

 


इस दिल को कई शिकायतें हैं तुझसे

क्या करें, कि चाहत भी सिर्फ तुझसे है

सब तजुर्बे दरकिनार कर हर बार 

नई उम्मीद, फिर लगा बैठते हैं....

                                - रुचि शुक्ला 

Sunday, 7 February 2021

क्या ये वाजिब सवाल है


आप की फ़रेब नज़रों का कमाल है

क्यों हूँ मलंग.. मैं अभी तक 

क्या ये वाजिब सवाल है...

                       - रुचि शुक्ला 

जो अलग हो गए तो कैसी झड़प

ये नज़दीकियाँ तब तलक मुनासिब समझ जो गिरह खोलने की गुंजाइश रहे रूठना मनाना सब ठीक है पर बात करने की गुंजाइश रहे ये तकरार साथ रहने तक हैं जो अल...