Tuesday, 12 March 2024

खेवय्या कोई ख़ास दमदार ही होगा

 


उलझन में फंदा डाल, कब कितनी ढील देना है

बेहतरीन कशीदगी हुनरमंद का काम है

माना कि क़ाबिल बहुतेरे होंगे,

डूबती कश्ती को किनारे लाए

खेवय्या कोई ख़ास दमदार ही होगा...

                           रुचि शुक्ला

जो अलग हो गए तो कैसी झड़प

ये नज़दीकियाँ तब तलक मुनासिब समझ जो गिरह खोलने की गुंजाइश रहे रूठना मनाना सब ठीक है पर बात करने की गुंजाइश रहे ये तकरार साथ रहने तक हैं जो अल...