Thursday, 30 April 2026

तू किसके इंतज़ार में है


 इस आबाद शहर में

सभी इंतज़ार में हैं

सब तेरे इंतज़ार में हैं

तू किसके इंतज़ार में है...

                 - रुचि शुक्ला

Saturday, 25 April 2026

मार झपट्टा, गई बिलैया


थाल सजाए बैठ हम

खाय रहे थे बोटी

मार झपट्टा, गई बिलैया

बची थाल मा रोटी..

              -रुचि शुक्ला

अपना नसीब होता है

 


वो तेरे पास है

तो न समझ ज़द में है

कुछ रहमत ख़ुदा की

कुछ दुआएँ अपनों की रही होंगी

थाल तो सब सजाते हैं मेहनत से

पर हर निवाले का 

अपना नसीब होता है..

                   - रुचि शुक्ला

Thursday, 23 April 2026

दुआएँ भी क़ुबूल होती हैं


 

यूँ ही जतन करते रहो

कोशिशें कब ज़ाया होती हैं

गुज़रते राहगीरों की

दुआएँ भी क़ुबूल होती हैं..

                      रुचि शुक्ला

Wednesday, 22 April 2026

पकाए तो तुम भी जाओगे

 


छुप कर बैठे हो

सोचते हो बच जाओगे

आज हम निगाह में है

पकाए तो तुम भी जाओगे...

                    - रुचि शुक्ला

Saturday, 18 April 2026

बुहार दिया कूड़े की तरह

 


वो बिछ गए थे राहों में

नजर-ए-इनायत होंगे

कुछ रौंद कर चले गए

कुछ ने बुहार दिया कूड़े की तरह...

                          - रुचि शुक्ला 

Friday, 17 April 2026

कसूर उनका नहीं


जाने दो कसूर उनका नहीं

ये दिल हमारा 

बाहर से कहाँ दिखता है

किसी चमन में लगा गुलाब नहीं है

जो नज़र-ए-इनायत हो जाता।

                            -रुचि शुक्ला

                                

Wednesday, 8 April 2026

हमें उससे मोहब्बत है

 


हमें उससे मोहब्बत है

ये इल्म तो था उसको

न इज़हार-ए-मोहब्बत हुई

न जिक्र उसने ही किया कभी

                     -रुचि शुक्ला

उम्र गुज़र गई


 हम ख़फा-ख़फा से हैं

ये इल्म तो था उसको

न हमने कभी बयाँ किया

न ज़िक्र उसने ही किया कभी

बात युहीं होती रही

और उम्र गुज़र गई...

                  -रुचि शुक्ला


Tuesday, 7 April 2026

जो वो नहीं तो कुछ नहीं


 अमावस के रात

तारों की बहार थी

कमबख्त इश्क तो चाँद से था

जो वो नहीं तो कुछ नहीं...

हर रात ही अमावस न हो जाए

 



वैसे तो हम

आसमा से चाँद उतार लाते

क्या करें फिक्र जमाने की है

कहीं हर रात ही अमावस न हो जाए..

                            रुचि शुक्ला


जो अलग हो गए तो कैसी झड़प

ये नज़दीकियाँ तब तलक मुनासिब समझ जो गिरह खोलने की गुंजाइश रहे रूठना मनाना सब ठीक है पर बात करने की गुंजाइश रहे ये तकरार साथ रहने तक हैं जो अल...