Saturday, 22 April 2023

महीनों गुजर गए कोई Sunday नहीं आया


 महीनों गुजर गए कोई Sunday नहीं आया...

शायद दफ्तरों में अब छुट्टी नहीं होती

टूटी कुर्सियाँ भी जंग खा रही हैं

सूने घरों की गूँज यूँ दीवारों में कैद है....

                          - रुचि शुक्ला

उन्हें फ़ुर्सत न थी वक्त पर


 

वो जिंदगी भर सफर में रहे 

और हम इंतजार में

उन्हें फ़ुर्सत न थी वक्त पर

और हमें वक्त से मलाल रहा...

                       - रुचि शुक्ला


जो अलग हो गए तो कैसी झड़प

ये नज़दीकियाँ तब तलक मुनासिब समझ जो गिरह खोलने की गुंजाइश रहे रूठना मनाना सब ठीक है पर बात करने की गुंजाइश रहे ये तकरार साथ रहने तक हैं जो अल...