Saturday, 13 January 2024

आवाज़ जो पुकार ले हमको


जिसकी तलाश में ताउम्र गुजार दी हमने

वो अदद दोस्त कहीं मिला ही नहीं  

हर तरफ़ शोर ही शोर पसरा है मग़र

एक आवाज़ जो पुकार ले हमको,

हसरत रही, मुकम्मल न हुई...

                              - रुचि शुक्ला

जो अलग हो गए तो कैसी झड़प

ये नज़दीकियाँ तब तलक मुनासिब समझ जो गिरह खोलने की गुंजाइश रहे रूठना मनाना सब ठीक है पर बात करने की गुंजाइश रहे ये तकरार साथ रहने तक हैं जो अल...