Wednesday, 6 May 2026

जो अलग हो गए तो कैसी झड़प


ये नज़दीकियाँ तब तलक मुनासिब समझ

जो गिरह खोलने की गुंजाइश रहे

रूठना मनाना सब ठीक है

पर बात करने की गुंजाइश रहे

ये तकरार साथ रहने तक हैं

जो अलग हो गए फिर कैसी झड़प...

                           - रुचि शुक्ला


Thursday, 30 April 2026

तू किसके इंतज़ार में है


 इस आबाद शहर में

सभी इंतज़ार में हैं

सब तेरे इंतज़ार में हैं

तू किसके इंतज़ार में है...

                 - रुचि शुक्ला

Saturday, 25 April 2026

मार झपट्टा, गई बिलैया


थाल सजाए बैठ हम

खाय रहे थे बोटी

मार झपट्टा, गई बिलैया

बची थाल मा रोटी..

              -रुचि शुक्ला

अपना नसीब होता है

 


वो तेरे पास है

तो न समझ ज़द में है

कुछ रहमत ख़ुदा की

कुछ दुआएँ अपनों की रही होंगी

थाल तो सब सजाते हैं मेहनत से

पर हर निवाले का 

अपना नसीब होता है..

                   - रुचि शुक्ला

Thursday, 23 April 2026

दुआएँ भी क़ुबूल होती हैं


 

यूँ ही जतन करते रहो

कोशिशें कब ज़ाया होती हैं

गुज़रते राहगीरों की

दुआएँ भी क़ुबूल होती हैं..

                      रुचि शुक्ला

Wednesday, 22 April 2026

पकाए तो तुम भी जाओगे

 


छुप कर बैठे हो

सोचते हो बच जाओगे

आज हम निगाह में है

पकाए तो तुम भी जाओगे...

                    - रुचि शुक्ला

Saturday, 18 April 2026

बुहार दिया कूड़े की तरह

 


वो बिछ गए थे राहों में

नजर-ए-इनायत होंगे

कुछ रौंद कर चले गए

कुछ ने बुहार दिया कूड़े की तरह...

                          - रुचि शुक्ला 

जो अलग हो गए तो कैसी झड़प

ये नज़दीकियाँ तब तलक मुनासिब समझ जो गिरह खोलने की गुंजाइश रहे रूठना मनाना सब ठीक है पर बात करने की गुंजाइश रहे ये तकरार साथ रहने तक हैं जो अल...