Sunday, 8 March 2026

कहाँ तूफां में दम है अपना रुख़ बदलने का

 



हवा की मस्तियाँ, आवारगी  नहीं

वो मौसम के इशारों पर, सर झुका कर चलती हैं  

कहाँ तूफां में दम है अपना रुख़ बदलने का

 वो तो किसी और के कहे, किसी ओर चलता है.. 

                                    - रुचि शुक्ला

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