Monday, 30 November 2020

तराने वही हैं, जो रूह को छू जाते हैं।

 


इबादत से जब शब्द खिलखिलाते हैं

वही नज़्म बन गुनगुनाए जाते हैं

शोर मचाने से संगीत नहीं बनता

तराने वही हैं, जो रूह को छू जाते हैं।

                               - रुचि शुक्ला

Monday, 23 November 2020

मतलब साध लेते हैं

 


न बच्चे हैं, न बूढ़े हैं

चालीस पार सयाने हैं

ज़बाँ बेबाक हो कितनी 

इसके भी पैमाने हैं

सच कहें या चुप बैठें

ये तो और बात है

मौक़ा देख कर, अब तो

मतलब साध लेते हैं.....

                 - रुचि शुक्ला

Friday, 13 November 2020

लिखना, कोई शौक नहीं


लिखना, कोई शौक़ नहीं

एक इबादत है

जो की नहीं जाती 

बस साकार होती है

नए शब्द जेहन में उतरते ही

दिल से, ये आगाज होती है....

                   - रुचि शुक्ला

Thursday, 12 November 2020

दिल ने नशेमन सजाया है


जज़्बात हैं, 

कोई लफ़्जों का खेल नहीं

दिल ने नशेमन सजाया है

उनसे तशरीफ़ की गुज़ारिश है... 

                   - रुचि शुक्ला

जो अलग हो गए तो कैसी झड़प

ये नज़दीकियाँ तब तलक मुनासिब समझ जो गिरह खोलने की गुंजाइश रहे रूठना मनाना सब ठीक है पर बात करने की गुंजाइश रहे ये तकरार साथ रहने तक हैं जो अल...