Monday, 23 November 2020

मतलब साध लेते हैं

 


न बच्चे हैं, न बूढ़े हैं

चालीस पार सयाने हैं

ज़बाँ बेबाक हो कितनी 

इसके भी पैमाने हैं

सच कहें या चुप बैठें

ये तो और बात है

मौक़ा देख कर, अब तो

मतलब साध लेते हैं.....

                 - रुचि शुक्ला

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