Monday, 30 November 2020

तराने वही हैं, जो रूह को छू जाते हैं।

 


इबादत से जब शब्द खिलखिलाते हैं

वही नज़्म बन गुनगुनाए जाते हैं

शोर मचाने से संगीत नहीं बनता

तराने वही हैं, जो रूह को छू जाते हैं।

                               - रुचि शुक्ला

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