Wednesday, 30 September 2020

मिसाल की मिसाल बनते थे

 

कुछ अँधे, कुछ बहरे 

मेरे वतन का नसीब लिखते हैं।

कि अब वो नहीं बचे जो 

मिसाल की मिसाल बनते थे...

                        -रुचि शुक्ला

                 

वक्त गुज़रा उसकी खैरियत


  


हाथों से कलम छूटे ज़माना गुजरा

कि लफ़्ज़ अब गढ़ने लगे इशारों से

कहने को ये जहाँ इस मुट्ठी में है

पर वक्त गुज़रा उसकी खैरियत जाने..

                            -रुचि शुक्ला

Friday, 11 September 2020

मतलब न निकालिये

 


सीधी सी बात के ,

मतलब न निकालिये

जो दिखते हैं हम,

वैसे ही जानिये ।

                  - रुचि शुक्ला

मूल्य बिकते नहीं

 


मूल्य बिकते नहीं

संस्कार की अमानत हैं

इन्हें संभाल कर रखना

इस जहाँ में चोर बहुत हैं। 

                         - रुचि शुक्ला

बिखरे हुए शीशे बहुत हैं

 


मेरे जज़्बात शब्दों में न बयाँ होंगे

मेरे बच्चे की पोशाक में चीथड़े बहुत हैं

सब रुख़सत हुए; मेरे ख्वाब यूँ अश्क बन

कि राह में बिखरे हुए शीशे बहुत हैं।

                                - रुचि शुक्ला

ये रुबाइयाँ कैसे बनी

 


ये रुबाइयाँ कैसे बनी

शायर क्या खबर

जब लिख गईं तो

वो यूँहीं मश्हूर हो गया।

                  - रुचि  शुक्ला

मैं, कुछ और निखर गई

 


ऐ ज़िन्दगी तेरी;

आज़माइश से,

मैं सवंर गई 

है शुक्रिया तेरा;

कि आज मैं,

कुछ और निखर गई।
         
                    - रुचि शुक्ला

कुछ लिखने कि चाहत


कुछ लिखने की चाहत

इस कदर हावी है

कलम नहीं , कागज़ नहीं

ये ख़यालों की रवानी है।
                                                            - रुचि शुक्ला

जो अलग हो गए तो कैसी झड़प

ये नज़दीकियाँ तब तलक मुनासिब समझ जो गिरह खोलने की गुंजाइश रहे रूठना मनाना सब ठीक है पर बात करने की गुंजाइश रहे ये तकरार साथ रहने तक हैं जो अल...