Monday, 18 January 2021

सरेआम ये सरगोशियाँ मुनासिब नहीं


सरेआम ये सरगोशियाँ मुनासिब नहीं

कहीं दूर एक खला तलाश लें

है वक्त गुज़रा दिल की बात कहे-सुने

चलो.. उफ़ुक़तले कुछ वक्त तराश लें...

                            - रुचि शुक्ला

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