Saturday, 18 April 2026

बुहार दिया कूड़े की तरह

 


वो बिछ गए थे राहों में

नजर-ए-इनायत होंगे

कुछ रौंद कर चले गए

कुछ ने बुहार दिया कूड़े की तरह...

                          - रुचि शुक्ला 

No comments:

Post a Comment

जो अलग हो गए तो कैसी झड़प

ये नज़दीकियाँ तब तलक मुनासिब समझ जो गिरह खोलने की गुंजाइश रहे रूठना मनाना सब ठीक है पर बात करने की गुंजाइश रहे ये तकरार साथ रहने तक हैं जो अल...