Saturday, 25 April 2026

अपना नसीब होता है

 


वो तेरे पास है

तो न समझ ज़द में है

कुछ रहमत ख़ुदा की

कुछ दुआएँ अपनों की रही होंगी

थाल तो सब सजाते हैं मेहनत से

पर हर निवाले का 

अपना नसीब होता है..

                   - रुचि शुक्ला

No comments:

Post a Comment

जो अलग हो गए तो कैसी झड़प

ये नज़दीकियाँ तब तलक मुनासिब समझ जो गिरह खोलने की गुंजाइश रहे रूठना मनाना सब ठीक है पर बात करने की गुंजाइश रहे ये तकरार साथ रहने तक हैं जो अल...