Friday, 14 August 2020

हमदम अपना सा मिलता नहीं है

 

शिकवे भी हैं, शकायतें भी हैं

मुश्किल ये है मोहब्बत भी है।

किसी और से दिल लगे भी तो कैसे
हमदम अपना सा मिलता नहीं है।  

                              - रुचि शुक्ला

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