Thursday, 13 August 2020

हसरत ही रही कि


        हसरत ही रही कि, 

       एक बेतरतीब सी जिंदगी जी लें।

       ये कायदों का रोग है लगा कि

       बेमानी सी जिंदगानी रह गई।

                              - रुचि शुक्ला

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