Tuesday, 20 October 2020

एक दिन हमको ही रोना पड़ेगा


घर तोड़ने का बहुत शौख है,

इन आसूँ का हमको मिलेगा सिला।

गुलशन-गुलिस्ताँ है बिखरा पड़ा,

एक दिन हमको ही रोना पड़ेगा... ।

                        -रुचि शुक्ला


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