Monday, 26 December 2022

चंद खास, अब फिर अपने हो गए हैं

 


चलो अच्छा है, अब घड़ी परेशां नहीं करती

बड़ी फुर्सत से, अपने-अपनों से हम मिलते हैं

वरना इस भीड़ में भी, तन्हाइयत थी

चंद खास, अब फिर अपने हो गए हैं...

                                  रुचि शुक्ला

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