Sunday, 18 December 2022

एक अर्सा हुआ हकीकत झेलते हुए


चाँद दूर से मदहोश करता था

जबसे नजदीकियाँ हुईं वो रंगत नहीं रही

मोहब्बत की ख़ुमारी किसी और को होगी

एक अर्सा हुआ हकीकत झेलते हुए..

                               -रुचि शुक्ला


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