Friday, 26 March 2021

अक़ीदे तोड़ देते हैं

 


इतने मुतमइन न हो ज़नाब

तुम इन दरख़्तों से बाक़िफ़ नहीं हो

अदावत के बिना भी ये

अक़ीदे तोड़ देते हैं...

                           -रुचि शुक्ला

No comments:

Post a Comment

जो अलग हो गए तो कैसी झड़प

ये नज़दीकियाँ तब तलक मुनासिब समझ जो गिरह खोलने की गुंजाइश रहे रूठना मनाना सब ठीक है पर बात करने की गुंजाइश रहे ये तकरार साथ रहने तक हैं जो अल...