Saturday, 27 March 2021

अंदाज-ए-बयां और था


उसके नसीब का निवाला 

यूँ नहीं ज़ाया हुआ

कुछ हाथ थे

जो नसीबा ही हलक से ले गए

वो कह गए

उसके लिखे का

अंदाज-ए-बयां और था...

                         -रुचि शुक्ला

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