Saturday, 3 October 2020

कोई बेगारी नहीं होती

 


बहुत से ख़्वाब बुनती हूँ,

मैं अकेले में।

ये मेरा इश्क है, 

यहाँ तन्हाई भी तन्हा नहीं रहती।

औरत हूँ, 

अपनी उम्मीदों पर जीती हूँ।

के मेरे काम में, 

कोई बेगारी नहीं होती।

                   -रुचि शुक्ला

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