Tuesday, 23 April 2024

हवाओं की तरह हमने बदल जाना नहीं सीखा


 

हवाओं की तरह हमने बदल जाना नहीं सीखा

माना जहाँ में वक्तपरस्त लोग कई हैं

दिन आज भी  लेकिन पूरब से निकलता है

दिवाकर ने अपना कभी ईमा नहीं बदला।

                              - रुचि शुक्ला

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