Friday, 12 April 2024

मजबूरियाँ रही होंगी


            

अमायार फ़िजूल ही बबाल करते हो

मेरे यार को ख़ामो खां बदनाम करते हो

तुम्हें क्या पता क्या मजबूरियाँ रही होंगी

क्या यूँ हीं, कोई अपना महबूब बदल लेता है।

                               - रुचि शुक्ला 

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